90+ Best Muharram Shayari in Hindi 2025

Muharram Shayari

Muharram Shayari in Hindi: मुहर्रम का महीना हमें करबला की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जहाँ इंसानियत, बलिदान और सच्चाई की मिसाल कायम की गई। मुहर्रम शायरी इन पलों को शब्दों में ढालने का एक सशक्त माध्यम है, जिससे हम इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके चाहने वालों के जज़्बे को महसूस कर सकते हैं।

यह शायरी केवल शोक प्रकट करने का जरिया नहीं, बल्कि सब्र, इंसाफ और ईमान की राह पर चलने की प्रेरणा भी देती है। हर शेर में करबला की सरज़मीन की गूंज होती है, जो दिल को छू जाती है और आंखों को नम कर देती है।

Muharram Shayari

Muharram Shayari
Muharram Shayari
दश्त-ए-बाला को अर्श का जीना बना दिया
जंगल को मुहम्मद का मदीना बना दिया
हर जर्रे को नज़फ का नगीना बना दिया
हुसैन तुमने मरने को जीना बना दिया !!
अपनी तक़दीर जगाते है तेरे मातम से
खून की राह बिछाते हैं तेरे मातम से
अपने इज़हार-ए-अक़ीदत का सिलसिला ये है
हम नया साल मनाते है तेरे मातम से !!
इमाम हुसैन की याद में मोहर्रम में हर दिल रोता है
उसकी कुर्बानी का संदेश हर आंखों को भिगोता होता है
इमाम हुसैन की वह यादें हमेशा द प्रेरित करती है
काश आज भी इमाम हुसैन होते या हर दिल कहता है !!
एक दिन बड़े गुरूर से कहने लगी ज़मीन
ऐ मेरे नसीब में परचम हुसैन का
फिर चाँद ने कहा मेरे सीने के दाग देख
होता है आसमान पर भी मातम हुसैन का !!
मुहर्रम का ये महीना, है सब्र की मिसाल
जहाँ हर दिल में है दर्द, और हर आंख में हाल
इमाम हुसैन की शहादत ने दी हमें राह
सिखाई इंसाफ़ और दिया न्याय का पैगाम !!

Dard Muharram Shayari in Hindi

Dard Muharram Shayari in Hindi
Dard Muharram Shayari in Hindi
अपनी तक़दीर जगाते है तेरे मातम से
खून की राह बिछाते हैं तेरे मातम से
अपने इज़हार-ए-अक़ीदत का सिलसिला ये है
हम नया साल मनाते है तेरे मातम से !!
ना तलवार से, ना फौज से डर लगे
जब बात हो हक़ की, तो हुसैन याद आए
कुर्बानी की जो मिसाल बन गए
उनके नाम से दिल रो पड़ जाए !!
गंगा और जमुना के संगम पर था
इमाम हुसैन की शहादत का निशान
हर आंखों में थे आंसू हर दिल में थे
दर्द कर्बला की जमीन में अमर हो
गए और कई जवान !!
ख़ून से लिखी थी जो वफ़ा की कहानी
वो आज भी रोती है हर एक ज़ुबानी
ग़म-ए-हुसैन को लफ्ज़ों में उतारें
मुहर्रम शायरी से दिलों को पुकारें !!
ये मातम, ये आँसू, ये ग़म की सदा
सब कहते हैं हुसैन ज़िन्दा है हमेशा
हर मोहर्रम में दिल से आवाज़ उठती है
जो हक़ पे मरे, वो कभी मरता नहीं !!

Imam Hussain Muharram Shayari

Imam Hussain Muharram Shayari
Imam Hussain Muharram Shayari
कर्बला की रेत पर लहू से लिखी गई दास्तान
हर कतरा चिल्ला उठा ये है हक़ की पहचान
ना पानी, ना साया, ना ज़िंदगी की राहत
फिर भी हुसैन ने छोड़ी नहीं सच्चाई की राहत !!
यूँ ही नहीं जहाँ में चर्चा हुसैन का
कुछ देख के हुआ था जमाना हुसैन का
सर दे के जो जहाँ की हुकूमत खरीद ली
महँगा पड़ा यजीद को सौदा हुसैन का !!
न हिला पाया वो रब की मैहर को
भले ही जीत गया वो कायर जंग
पर जो मौला के डर पर बैखोफ शहीद हुआ
वही था असली और सच्चा पैगंबर !!
कर्बला की कहानी में कत्लेआम था
लेकिन हौसलों के आगे हर कोई गुलाम था
खुदा के बन्दे ने शहीद की कुर्बानी दी
इसलिए उसका नाम पैगाम बना !!
करीब अल्लाह के आओ तो कोई बात बने
ईमान फिर से जगाओ तो कोई बात बने
लहू जो बह गया कर्बला में उनके
मकसद को समझो तो कोई बात बने !!

Muharram Shayari in Hindi

Muharram Shayari in Hindi
Muharram Shayari in Hindi
मुहर्रम पर याद करो वो कुर्बानी
जो सिखा गया सही अर्थ इस्लामी
ना डिगा वो हौसलों से अपने
काटकर सर सिखाई असल जिंदगानी !!
वो जिसने अपने नाना का वादा वफा कर दिया
घर का घर सुपुर्द-ए-खुदा कर दिया
नोश कर लिया जिसने शहादत का जाम
उस हुसैन इब्न अली को लाखों सलाम !!
गुरूर टूट गया कोई मर्तबा ना मिला
सितम के बाद भी कुछ हासिल जफा ना मिला
सिर-ऐ-हुसैन मिला है यजीद को लेकिन
शिकस्त यह है की फिर भी झुका हुआ ना मिला !!
फिर आज हक़ के लिए जान फिदा करे कोई
वफ़ा भी झूम उठे यूँ वफ़ा करे कोई
नमाज़ 1400 सालों से इंतजार में है
हुसैन की तरह मुझे अदा करे कोई !!
सजदे से कर्बला को बंदगी मिल गई
सब्र से उम्मत को ज़‍िंदगी मिल गई
एक चमन फातिमा का गुज़रा
मगर सारे इस्लाम को ज़‍िंदगी मिल गई !!

मुहर्रम शायरी हिंदी में

Karbala Muharram Shayari

Karbala Muharram Shayari
Karbala Muharram Shayari
कर्बला की जमीं पर खून बहा
कत्लेआम का मंजर सजा
दर्द और दुखों से भरा था सारा जहां
लेकिन फौलादी हौसले को शहीद का नाम मिला !!
आँखों को कोई ख्वाब तो दिखायी दे
ताबीर में इमाम का जलवा तो दिखायी दे
ए इब्न-ऐ-मुर्तजा सूरज भी एक छोटा सा जरा दिखायी दे !!
हुसैन की शहादत का है या महीना
मोहर्रम में हर आंख में आंसू रोता है
मां फातिमा का चला गया लाल
कर्बला की जमीन में जो सोता है !!
अलविदा कहे इस दर्द को
हर दिल में रहे शहादत हुसैन की
मोहर्रम की शायरी में बसी है
इमाम हुसैन की यादें दर्द की !!
एक दिन बड़े गुरूर से कहने लगी जमीन
है मेरे नसीब में परचम हुसैन का
फिर चाँद ने कहा मेरे सीने के दाग देख
होता है आसमान पर भी मातम हुसैन का !!

Muharram Ki Shayari

Muharram Ki Shayari
Muharram Shayari
 अपनी तकदीर जगाते हैं तेरे मातम से
खून की राह बिछाते हैं तेरे मातम से
अपनी इजहारे-ए-अकीदत का सिलसिला ये है
हम नया साल मनाते हैं तेरे मातम से !!
कर्बला को कर्बला के शहंशाह पर नाज है
उस नवासे पर मुहम्मद को नाज है
यूँ तो लाखों सिर झुके सजदे में
लेकिन हुसैन ने वो सजदा किया
जिस पर खुदा को नाज है !!
कर्बला की जमीन पर या लिखा था
इमाम हुसैन ने एक नया इतिहास लिखा था
इमाम हुसैन की गूंज उठी थी आवाज
जो जुल्म के खिलाफ एक संदेश लिखा था !!
खून से लिखा हुआ था वह हुसैन का नाम
हर दिल में बसे थे सुबह और शाम
सच्चाई के मिसल अमन की राह
जहां हर सुकून का था इंतजाम !!
क्या हक अदा करेगा ज़माना हुसैन का
अब तक ज़मीन पर कर्ज़ है सजदा हुसैन का
झोली फैलाकर मांग लो मुमीनो
हर दुआ कबूल करेगा दिल हुसैन का !!

Imam Hussain Shayari

Imam Hussain Shayari
Imam Hussain Muharram Shayari
जन्नत की आरज़ू में कहां जा रहे हैं लोग
जन्नत तो कर्बला में खरीदी हुसैन ने
दुनिया-ओ-आखरात में जो रहना हो चैन से
जीना अली से सीखो मरना हुसैन से !!
खून से चराग-ए-दीन जलाया हुसैन ने
रस्म-ए-वफ़ा को खूब निभाया हुसैन ने
खुद को तो एक बूँद न मिल सका लेकिन
करबला को खून पिलाया हुसैन ने !!
आँखों को कोई ख्वाब तो दिखायी दे
ताबीर में इमाम का जलवा तो दिखायी दे
ए इब्न-ऐ-मुर्तजा सूरज भी
एक छोटा सा जरा दिखायी दे !!
प्यास थी शदीद, मगर शिकवा नहीं किया
हर दर्द को सब्र से जिया और जिया
हुसैन ने दिखाया जो वफ़ा का रास्ता
वो हर मोमिन के दिल में बस गया !!

हुसैनी शायरी हिंदी में
पानी का तलब हो तो एक काम किया कर
कर्बला के नाम पर एक जाम पिया कर
दी मुझको हुसैन इब्न अली ने ये नसीहत
जालिम हो मुकाबिल तो मेरा नाम लिया कर !!

Imam Hussain Shayari 2 Line

Imam Hussain Shayari 2 Line
Imam Hussain Shayari 2 Line
ना पूछ वक़्त की इन बेजुबान किताबों से
सुनो जब अज़ान तो समझो के हुसैन जिंदा है !!
रात आई है असुर की हर दिल में रोशनी जलाई
इमाम हुसैन की याद में हर आंख में आज आंसू बहाई !!
कर्बला कोई जंग नहीं, सब्र का इम्तिहान था
जहाँ हर जख्म में भी मोहब्बत का अरमान था !!
कर्बला की शहादत इस्लाम बना गयी, खून तो बहा था
लेकिन कुर्बानी हौसलों की उड़ान दिखा गयी !!
सबा भी जो गुजरे कर्बला से तो उसे कहता है 
अर्थ वाला तू धीरे गूजर यहाँ मेरा हुसैन सो रहा है !!

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